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अनुच्छेद 370 कश्मीर में क्या है

(देवेश प्रताप सिंह राठौर)
(वरिष्ठ पत्रकार)

भारत की आजादी वर्ष 1947 में प्राप्त हुई तभी यह धारा 370 अमल में आया इस नियम के जरिये भारत पाकिस्तान का बंटवारा किया गया तथा एक आजाद देश बना 72 वर्षों का बना धारा 370 आखिरकार 5 अगस्त को लोकसभा में पास हो गया दो दिन पूर्व राज्यसभा में पारित हो चुका था। अब काश्मीर एवं लद्दाख केन्द्र शासित राज्य हो गये अब अपनी-अपनी अलग विधायिका होगी तथा लद्दाख बिना विधायिका वाला प्रशासित राज्य क्षेत्र होगा। अनुच्छेद 370 भारत के संविधान में 17 अक्टूबर 1949 में शामिल किया गया यह कानून से यह काश्मीर भारत के संविधान से अलग है तथा राज्य अपना संविधान स्वयं तय करने का अधिकार है।
आर्टिकल 370 केन्द्र की सरकार को उनके राज्य के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं रहता है। 1947 में राजा हरिसिंह द्वारा संधि पर हस्ताक्षर किये गये। अगर केन्द्र सरकार ने कोई कानून बनाया है वह बिना राज्य के धारा 370 के अनुसार बिना इजाजत लागू नहीं कर सकती है। जब यह 1949 में संविधान में धारा 370 जोड़ी गयी तो आस्थायी का वर्णन किया गया है यह हमेशा के लिये नहीं था उस समय कि स्थिति को देखकर 370 का का बनाया जाना रहा। जम्बू सरकार को इसे हटाने एवं रखने का काम था तथा काश्मीर की संविधान सभा ने इसे लागू रखने का फैसला किया क्यों न करते इसके तहत नेता काश्मीर के स्वयं का विकास होता रहा किसी ने किसी माध्यम से पैसा आता रहा तथा काश्मीर में कोई बाहरी व्यक्ति 370 के तहत नहीं रह सकता स्थायी वहां मकान जमीन खरीद कर नहीं वहां पर अस्पताल है न ही फैक्ट्री है न ही शिक्षा का बन्दोबस्त है कोई कमायी का जरिया नहीं है क्योंकि वहां पर 370 धारा के तहत बाहरी व्यक्ति या संस्थान कुछ बना सके अशिक्षा का आभाव तथा वहां के नेता आतंकवाद के नाम से कमायी कर रहे सभी के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे इन सबसे पूछो कौन सा काश्मीर में इनका कारोबार चल रहा सिर्फ दहशत फैलाना। शिक्षा हीन लोगों को गरीब बेरोजगारों का किराये दर काम देते वह भी पत्थर फैकों हमारी वीर सेना पर यह कारोबार हे। वहां पर वर्ष 2017 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा यह दलील खारिज कर दी गयी थी। अनुच्छेद 370 अस्थायी तौर पर है और इसे काश्मीर में जारी रखना अब धोखा होगा। यह बुद्धजीवियों एवं महामहिम राष्ट्रपति के आदेश से जम्बू कश्मीर की संविधान सभा से इसे समाप्त किया जा सकता है। भारत के गृहमंत्री भी मित शाह द्वारा कहा गया जम्बू काश्मीर संविधान 26 जनवरी 1957 को भंग हो चुकी है। अब राज्यों में गर्वनर नियम है इस लिए राष्ट्रपति ही इसे समाप्त करने के लिए काफी है। अनुच्छेद 35 ए संविधान का वह अनुच्छेद है जो वहां के स्थायी निवासियों को पारभाषित किया जा सके। वर्ष 1954 मैं भारत के राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद के द्वारा एक आदेश पारित किया गया था।
इस संविधान के जरिये नये अनुच्छेद 35 ए जोड दिया गया था 35 ए के जरिये कोई भी व्यक्ति पहले से या 10 वर्ष से राज्य में रहने के प्रमाण प्राप्त होते है और उसने सम्पत्तियां हासिल की गयी है वह वहां का स्थायी नागरिक माना जायेगगा135 ए के जरिए राज्य को विशेष दर्जा दिया जाए उसके साथ वहां पर रह रहे स्थायी निवासियों की पहचान तथा बाहरी लोग काश्मीर राज्य के वह जमीन घर दुकान कुछ भी नहीं खरीद सकते है तथा वहां के स्थायी नागरिकों की पहचान बाहरी लोगों को राज्य सरकार में नौकरी नहीं कर सकते है। यह सब कुरीतियों के कारण वहां पर उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुक्ती अलगाववादी नेता, हुर्रियत नेता पलपोस रहे थे। अब उनकी कमायी एवं राजनीति के पैर खिसकते दिख रहे है यह लोग नहीं चाहते काश्मीर में विकास हो क्योंकि इनको पता है काश्मीर का विकास हुआ तो हमारा विनाश निश्चित है। इस कारण विरोध कर रहे है। 
आपको बताना चाहेगे वर्ष 1947 में बसे हिन्दु परिवार वहां पर आज भी शरणार्थी का जीवन बिता रहे है। यह शरणार्थी वहां पर सरकारी नौकरी नहीं कर सकते है। सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं निकाय एवं जिला पंचायत में वोट नहीं डाल सकते है। 5 अगस्त भारत की आजादी का महान दिवस रहा जिसमें आर्टिकल 370 को समाप्त कर दिया गया यह भारतीय जनता पार्टी द्वारा पार्ट टू की शुरूआत में बिल पास करने का जो सिलसिला चला जैसे तीन तलाक बिल भी पास हो गया वास्तव में मोदी है तो सब मुमकिन है।
भारत की आजादी के बाद भारत को रत्न नहीं महारत्न प्राप्त हुआ है यह बहुत ही भारत के अच्छे दिन कहा जाने वाली बात सही हो रही है मैं कह सकता मोदी इस कार्यकाल में आगे भी मोदी ही रहेगे यह पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता जो किसी ने नहीं किया वह सब पांच वर्ष दो माह की सरकार मोदी ने कर दिखाया है। आज भारत का हर व्यक्ति गर्व करता है हमारे विदेशों में रहने वाले भारतीय जब वहां पर बताते है हम भारत के हे तो उस देश का नागरिक कहता है जहां मोदी है वहां के हो यह इज्जत मिलती है। भारत मजबूत हो रहा इसमें कोई शक नहीं पर कुछ क्षेत्रीय दलों का अब सफाया निकट है। 
वैसे धारा 370 हटने से जिन्हें परेशानी हुई है सबसे अधिक वहां के दो पार्टी के नेताओं के उनकी दुकान कमाई की बन्द हो गयी है। आज भारत में काश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो वहां पर नियम केन्द्र सरकार के होने चाहिये धारा 370 से कोई नियम नहीं चलते थे अब विकास होगा वहां के निवासियों को नौकरी एवं पढ़ाई का रास्ता साफ हुआ चिकित्सा सुविधा अच्छी होगी बहुत से लाभ है परंतु वहां के क्षेत्रीय दल जनता को गुमराह करते रहे जिसका परिणाम रहा गरीबी बेरोजगारी और व्यवसाय न के बराबर है। आज काश्मीर की धारा 370 हटने से पाकिस्तान तिलमिला गया वह हमारे देश का कौन होता है मार्ग दशैन देने वाला जो स्वयं अपने लिए गड्ढा खोद रहा है। वैसे पार्ट 2 मोदी सरकार ने सिर्फ शपथ के 65 वे दिन 370 धारा हटाई एवं इसके पूर्व तीन तलाक का बिल पास हुआ लाइन लगा  दी बिल पास होने की यह बड़े मुद्दे थे इस लिए सभी चिल्ला रहे है परंतु भारत अब काश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक सिर्फ एक झंडा तिरंगा लहरायेगा अब यह नहीं कोई राज्य अपना झंडा लेकर चले एक राष्ट्र एक ध्वज होना जरूरी था जो मोदी सरकार ने करके दिखा दिया है।

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