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कजली विसर्जन कर मनाया गया त्योहार

छाबी तालाब में किया गया कजली विसर्जन 
गाजे-बाजे के साथ निकाला गया कजली जुलूस 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । बुंदेलखंड इलाके में रक्षा बंधन के एक दिन बाद कजलियों का त्योहार भी धूमधाम से मनाया जाता है। शुक्रवार को शहर के बीच स्थित ऐतिहासिक छाबी तालाब में कजलियां खोंटने के लिये महिलाओं की भारी भीड़ रही। इस क्षेत्र में कुछ जगह तो कजलियों के त्योहार के दिन ही राखियां बंधवाई जाती 
कजली लेकर तालाब की ओर जातीं युवतियां 
हैं। बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना के लिये नागपंचमी के दिन कजलियां एक मटके में बोती हैं। इसके बाद रक्षा बंधन के दूसरे दिन यहां छाबी तालाब में महिलाएं सामूहिक रूप से कजलियां खोंटती हैं। सुबह से ही छाबी तालाब इलाके में चहल-पहल रही। बुंदेलखंड क्षेत्र में ऐसी मान्यता है कि कजलियों का त्योहार वास्तव में फसल से जुड़ा त्योहार है, जिसे भाई बहन के असीम प्रेम के इस त्योहार से जोड़ दिया गया है। नागपंचमी को गेहूं मटकी में इसलिये बोया जाता है ताकि एक तरह खेतों में बुआई से पहले उसकी बढ़त देखी जा सके। यदि मौसम अनुकूल रहता है तो कजलियों के त्योहार तक उस मटकी में बोये गये गेहूं के बीज काफी तेजी के साथ बढ़ते हैं और यदि नहीं बढ़ते तो किसान इससे अंदाज लगा लेते थे कि इस बार रबी की फसल में बेहतर पैदावार के लिये उन्हें और कौन से प्रयास करने होंगे। 

मेले में बिके खिलौने, बच्चों ने लिया झूलों को लुत्फ
बांदा। छाबी तालाब में हर बार की तरह इस बार भी कजलिया मेला का आयोजन हुआ। महिलाओं और पुरुषों से कहीं ज्यादा यहां बच्चों की आमद रही। बच्चों ने मेले में झूलों का जमकर लुत्फ लिया। चाट, पकौड़ी और सौंदर्य प्रसाधन की भी दुकानें सजीं रही। दुकानों में एक से बढ़कर एक खिलौने बिकते हैं। बच्चे यहां से खिलौने इसलिये भी खूब खरीदते हैं ताकि आने वाले जन्माष्टमी के त्योहार में इन्हें अपने घरों में सजाया जा सके। उधर महिलाओं के प्रसाधन का तमाम सारा आइटम भी बिकता है। रंग बिरंगे परिधानों में महिलाएं खरीदारी भी खूब करती हैं। 

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