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मंदिर तोड़े जाने पर अनुयायियों में उबाल

मोस्ट युवा जागृति संस्थान ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
मंदिर को पुनः उसी स्थान पर स्थापित करने की मांग

बांदा, कृपाशंकर दुबे । दिल्ली के तुलगकाबाद स्थित सैकडों वर्ष पुरान करोडो दलितों पिछडो की आस्था का केन्द्र संत गुरू रविदास मंदिर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भजपा सरकार की पुलिस व प्रशासन द्वारा तोड दिया गया। जिसका अनुयायियों ने विरोध दर्ज कराया है। मोस्ट युवा जागृति संस्थान ने शनिवार को डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर मंदिर को उसी स्थान पर स्थपित कराये जाने की मांग की है।
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते मोस्ट युवा जाग्रति संस्थान पदाधिकारी 
राष्ट्रपति को भेजे गये ज्ञापन में मोस्ट युवा जागृति संस्थान के योगेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि बीते दस अगस्त को मंदिर तोड दिये जाने से करोडों लोगों की भावनाये आहत हुई है। पूरे समाज में आक्रोश पनप रहा है। भारत की एकता अखण्डता टूटने का खतरा महसूस हो रहा है। मोस्ट युवा जागृति संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष कैलाश बौद्ध के आहवान पर बुन्देलखण्ड के प्रत्येक जिले में विरोध प्रदर्शन करके ज्ञापन भेजे जा रहे है। कहा कि भारत के एकता अखण्डता बनाये रखने के लिये सुप्रीम कोर्ट में आपके द्वारा एक रिट दायर की जाये और मंदिर को पुनः स्थापना हेतु अपील की जाये। उन्होने मांग की है कि जल्द से जल्द मंदिर की स्थापना उसी जगह पर पुनः स्थापित कराया जाये। साथ ही बीते 21 अगस्त को भीम आर्मी के संस्थाप चन्द्रशेखर रावण व सैकडों लोगों पर दिल्ली में हुये विरोध प्रदर्शन में मुकदमा व गिरफ्तारी हुई है, उनके मुकदमे वापस लेकर सभी को जेल से रिहा किया जाये। इस दौरान सुखलाल बौद्ध, बुद्धराज वर्मा, पवन देवी, सूरज सिंह, शिव प्रसाद, धर्मेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

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