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जलस्तर गिरने से ट्यूबवेल व समर्सिबल ठप, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

गंगा व यमुना कटरी के गाँवो को छोड़ लगभग समुचित जनपद में गिरा जलस्तर
फसलों के भरोसे बैंक व साहूकारों से लिए कर्ज को चुंकाने में पड़ेंगे लाले

फतेहपुर, शमशाद खान । अपेक्षित बरसात न होने के कारण गंगा एवं यमुना कटरी से इतर दूर दराज के इलाके भीषण जल संकट से जूझने लगे है। जल स्तर के तेजी से नीचे गिर जाने के कारण किसानों के ट्यूबवेल भी बन्द हो चुके है। नतीजा यह है कि खेती के लिये पानी मिलना भी दूभर हो रहा है। बरसात न होने के कारण जहाँ किसानों के खेत पहले ही सूखे पड़े हैं वही सिंचाई के लिये नहरों में भी पानी नही है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों को पानी देने के लिये सिंचाई के लिये एकमात्र साधन समर्सिबल पम्प या ट्यूबवेल ही बचते है लेकिन जलस्तर गिर जाने के कारण ट्यूबवेल भी पानी नही उठा रहे है और ठूंठ बनकर रह गए है। 
जलस्तर गिरने की सबसे अधिक समस्या से ग्रस्त सदर तहसील के कई ब्लाकों समेत खागा तहसील के ऐरायां, हथगाम, धाता, विजयीपुर, बिन्दकी क्षेत्र के ब्लाक के गांव शामिल है। बैंकों से लेकर साहूकारों तक के कर्जे में दबे किसान भीषण आर्थिक संकट से पहले ही दबे हुए है। कर्ज लेकर बीज खाद समेत अन्य चीजो की व्यवस्था कर अच्छी फसल होने की आस लगाए बैठे किसानों को सिंचाई की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई न हो पाने के कारण किसानों की धान की फसल बर्बादी की कगार पर आ खड़ी हुई है। वहीं बाजरा, मकाई, करेला इत्यादि फसल भी बर्बादी के मुहाने पर खड़ी है। जानकारों की माने तो घरेलू इस्तेमाल के समर्सिबल पम्प के अथाह बोरिंग होने के कारण जहाँ पानी की बर्बादी बढ़ी है वही बरसात के कम होने के कारण नदियों, कुओं एव तालाब सूख चुके है। जिसके कारण जल स्तर गिरने से भीषण जल संकट का पैदा हो गया है। सिंचाई न हो पाने के कारण बर्बाद फसलों को देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें है। जबकि साहूकारों व बैंक के कर्ज न चुका पाने के कारण होने वाली कार्रवाई का भय भी बना हुआ है। हालात यह है कि किसान अपनी फसलों को बचाने के लिये सम्पत्ति गिरवी रखने के साथ ही एक बार फिर से कर्ज लेकर अपने समर्सिबल व ट्यूबवेल की डीप बोरिंग कराने को मजबूर है। कर्ज से कराह रहे किसान के सामने आर्थिक संकट से उबर पाना जहाँ एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। वही बरसात न होने के कारण प्रकृति की भीषण मार से भी पीड़ित है। चारो ओर से समस्याओ से घिरे हुए किसान को किसी सरकार से मदद की उम्म्मीद भी नही दिखाई दे रही है। ऐसे में किसानों का एक बार फिर से प्रकृति और भगवान ही सहारा दिखाई दे रहा है।

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