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हजारों बेगुनाहों का मिला कर खून पानी में, हमारे अमन के कातिल बसे हैं राजधानी में

शेरकोट नगर में हुआ अजीमुशान मुशायरा

शेरकोट, संजय सक्सेना । नगर में  'एक शाम नदीम के नाम अजीमुशान मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें मकामी व वहरुनी शायरों ने अपने कलाम से समा बांध दिया।  मुशायरा कामयाबी के साथ सुबह सादिक के वक्त तक चला।  मुशायरे में वक्तिया हालात व प्रेम भरी शायरी से जहां नौजवानों की नब्ज टटोली गयी, वहीं मजाहिया शायर ने भी सब को खूब गुदगुदाया।  
मोहल्ला काजीसराय मे एक शाम नदीम के नाम अजीमुशान मुशायरे का उद्घाटन समाजसेवी डा आसिफ व बाबू रकीब साहब ने फीता काट व शमा रौशन कर किया, जिसके बाद सिराजुद्दी पेकर पानीपती की नात ए पाक  से मुशायरे का आगाज किया गया। मुशायरे में बढ़ापुर से आये नौजवान शायर रफी बढ़ापुरी ने युवाओं की नब्ज पर हाथ रखते हुए अपना कलाम पढ़ा, उन्होंने कहा कि -खैरात कर के घर से जब मे चला सफर को, गर अजाब आता सदके से टल गया, अख्तर मुल्तानी नजीबाबादी ने कहा कि-क्या दुख हैं खुदा जाने किस बात पे रो लो हो ,कि सूखी हुई पलकों को अश्कों से भिगो लो। अशरफ पेन्टर अफजलगढ़ी का यह शेर बहुत पसंद किया गया... बीबी भी हो, बच्चे भी हो, भाई बहन भी हों ,मां बाप नहीं घर में तो घर ठीक नहीं।
 मुशायरे की शानदार निजामत कर रहे इरशाद धामपुरी ने कहा कि- यह दौलत का नशा इंसान को मगरुर करता है, मगर तालीम का दीपक अंधेरे दूर करता है। महिला शायर निगहत मुरादाबादी ने प्रेम भरी गजले पढ़ते हुए कहा -मुझ को करना था इंकार मगर कर बैठी इकरार, मुझ को प्यार हुआ है, पढ़ खूब दादो तहसीन हासिल की। सिराजुद्दीन पेकर पानीपती ने जज्बाती शायरी करते हुए कहा कि...हजारों बेगुनाहों का मिला कर खून पानी में, हमारे अमन के कातिल बसे हैं राजधानी में।  शफ्कत भारती ने कुछ यूं कहा वो -जब से दूर गया और पास रहने लगा, बगैर उसके उसके मेरा दिल उदास रहने लगा, कारी ग्यासुद्दीन ग्यास ने कहा कि- हम लङ़े तीर ओ तलवार खंजर से क्यो, हाथ म़े मेरे कलम किस लिये है। अन्सर बिजनौरी ने कहा-हो मुबारक नई जिन्दगी आप को , एक हो जाने की यह खूशी आप को ,मुशायरे में मजाहिया शायर अनवर बदायूनी धङाधड़ ने हंसी के फुहारे छुड़ाते हुए कहा कि- बिरयानी मिल जाये तो  चटाचट कर दे ,मिल जाये गंजा तो सटासट कर दे।  बाकर बिजनौरी ने बेटियों ंंके हवाले से कहा-बेटियां होती हैं खुदा की रहमत, जिसके घर में हो घरबार बदल जाता है। मुकीम शेरकोटी ने कहा-मत समझना झूठा इसे यह खाब की तामीर थोङी है ,कलम है हाथ मे तेरे कोई शमशीर थोङी है। बशारतुल्ला बशर ने कहा कि-खूशबू मेरे बदन से अभी तक नहीं गयी, छू लिया था उसने जो मुझे खेलते हुए। इनके अलावा मुशायरे में अबरार हमदम आलम देहलवी, फुरकान इण्डियन नगीनवी आदि शायरों ने भी अपने कलाम से नवाजा। सुबह चार बजे तक चले मुशायरे की निजामत इरशाद धामपुरी व सदारत हकीम जलील़ अहमद ने की।

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