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सुषमा स्वराज का आकस्मिक निधन

( देवेश प्रताप सिंह राठौर)

देश की राजनीति परचम लहराने वाली सुषमा स्वराज सबसे कम उम्र की महिला विधायक के रूप में 1977 में चुनी गई थी, उनका जन्म अंबाला 1952 में हुआ था उनके पिता आर एस एस के वरिष्ठ कारसेवक रहे सुषमा स्वराज इस देश की वह नेताओं में गिनती थी जिनके पास मानवीय छवि का श्रेष्ठ भाव हमेशा अंदर व्याप्त रहते थे
वह किसी की कितनी मदद कर सके उनके द्वारा कितने काम अच्छे हो सके यह धारणा उनकी हमेशा रही है वह भारतीय जनता पार्टी की तेज वक्ता के रूप में पहचान थी , तथा कानून की पढ़ाई करने के बाद और सुप्रीम कोर्ट में कुछ दिन कार्य भी किया है, सुषमा स्वराज 1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया इनकी छविइतनी अच्छी थी देश विदेश में सभी लोग इनकीबहुत ही इज्जत सम्मान   किया करते थे उन्होंने कभी पद के ऊपर अहंकार नहीं दिखाया, वह हमेशा अपने द्वारा कितनों की मदद कर सकें और उनके विभाग में आए हुए केश का निस्तारण  ईमानदारी से किया करते थी। डोकलाम से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक उन्होंने विश्व को देश में स्पष्ट रूप से अवगत कराया जो हमेशा याद रखा जाएगा,आज उनका आकाशमिक निधन से देश को बहुत ही क्षति पहुंची है, 67 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन जम्मू कश्मीर में धारा 370 को उन्होंने हटाए जाने पर बहुत ही प्रसंता जाहिर के और रात्रि करीब १० बजे हृदय गति रुक जाने से उनकी मृत्यु हो गई भारत ने एक बहुत अच्छे नेता के साथ बहुत अच्छी कुशल नेत्री एवं मानव हित की निपुण मानव के हित के लिए लड़ाई करने वाली हमने अपने सब की प्रिय सुषमा स्वराज को खो दिया है अब उनकी यादें ही बची हम ईश्वर से दुआ करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति मिले तथा उनके परिवार को इस दुखद घड़ी को सहने की हिम्मत प्रदान करें।

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