Recent comments

Latest News

बहनो ने भाईयों की कलाई में बांधा रक्षासूत्र

जिले में धूमधाम से मनाया गया रक्षाबंधन पर्व

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । जिले में रक्षाबंधन का त्योहार हर्षोल्लासपूर्ण माहौल में मनाया गया। बहनों ने भाईयों की कलाई में राखी बांधकर रक्षा का वचन लिया। पर्व के दिन सवेरे से मिठाई वा राखियों की दुकानों में भीड़ देखने को मिली।

भाई-बहन का त्योहार रक्षाबंधन के दिन सवेरे से लड़कियां व महिलायें नदी-तालाबों में पहुंचकर कजलिया विसर्जन किया। मंदिरों में भगवान को कजलिया अर्पण करने के बाद बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर कलाई में रक्षासूत्र बांध रक्षा करने का वचन लिया। भाईयों ने भी बहनों को यथाशक्ति उपहार भेंटकर उन्हें वचन निभाने का संकल्प किया। भाई-बहनों ने एक-दूसरे को मीठा खिलाया। इसी क्रम में तीर्थ क्षेत्र चित्रकूट के विधवा आश्रम की विधवाओं ने प्रमुख देवता कामतानाथ को राखी बांधकर त्योहार मनाया। सवेरे से ही मुख्यालय में जगह-जगह टेंट लगाकर राखी वा मिठाईयों की दुकाने सजी रहीं। जहां राखी व मीठा खरीदने के लिये लोगों की भीड लगी रही। चार दिन तक हुई बारिश के कारण दुकानदारों में खासी चिंता थी कि कहीं त्योहार फीका न पड़ जाये, किन्तु सवेरे बदली छाये रहने के बावजूद लोग घरों से निकलकर खरीददारी की और त्योहार का लुत्फ उठाया। पर्व पर मऊ, मानिकपुर, पहाडी, राजापुर, सीतापुर समेत पूरे जिले में भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार हर्षोल्लासपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर लडकियों ने पेड़ों पर झूला डालकर गीत गाते हुये झूले का आनन्द उठाया। भागवत रत्न आचार्य नवलेश दीक्षित ने परम्परा के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि भाई-बहन के लिये रक्षाबंधन का त्योहार का शुभ मुहूर्त आया है। यह मुहूर्त भाई-बहन के अटूट प्यार का प्रतीक होगा।


एसपी ने राखी बंधवा सुरक्षा का दिया भरोसा
चित्रकूट। पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार झा ने भाई-बहन के पावन पर्व रक्षाबन्धन पर पाठा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सरहट मानिकपुर में बहनों से राखी बंधायी। उन्होंने उपहार देकर पुलिस परिवार की तरफ से सुरक्षा का आश्वासन दिया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य विनय त्रिपाठी, थाना प्रभारी निरीक्षक केशव प्रसाद दुबे, पीआरओ वीरेन्द्र त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

रक्षाबंधन के समय कजलिया का महत्व

चित्रकूट। रक्षाबंधन के दिन जिस तरह रक्षासूत्र का महत्व है उसी प्रकार कजलियों का भी महत्व है। बहने अपने भाईयों के कानो के बगल में कजलियों को रखकर दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं कई आचार्यों ने बताया कि कजलिया रोग, शोक और रक्षा से भी रक्षा करती है। बताया कि प्रत्येक धार्मिक कार्य प्रारंभ करने के पूर्व जौ व गेंहू बोया जाता है। उससे निकलने वाले पौधे को कजलिया एक माह तक कहा जाता है। यह पौधा किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होने देता। इसी कारण रक्षाबंधन के दिन 15 दिन पूर्व बोई गई कजलिया को निकालकर नदी, तालाब में कुछ हिस्सा विसर्जित कर कुछ हिस्सा साथ लाकर ईष्ट देव को समर्पित करने के पश्चात भाईयों के कानो में रखकर दीर्घायु व मंगल की कामना करती है। रक्षाबंघन के दिन कजलियों का भी विशेष महत्व है।

No comments