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निरंकारी भक्तों ने मुक्ति पर्व के रूप में मनाया स्वतंत्रता दिवस

संत निरंकारी भवन में आयोजित किया गया सत्संग

बांदा, कृपाशंकर दुबे । स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर मुक्ति पर्व समागम संत निरंकारी सत्संग भवन शास्त्री नगर में जोनल इंचार्ज डा. दर्शन सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। उन्होने अपने प्रवचनों में फरमाया कि मुक्ति पर्व समागम प्रति वर्ष 15 अगस्त को आयोजित किया जाता है। इस दिन जहां देश में राजनैतिक स्वतंत्रता का आनन्द प्राप्त हो रहा होता है वहीं संत निरंकारी मिशन इस आनन्द में आत्मिक स्वतंत्रता से प्राप्त हाने वाले आनन्द को भी सम्मिलित कर मुक्ति पर्व मनाता है।
निरंकारी भवन में मौजूद भक्त
उन्होने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि मिशन का मानना है कि जहां राजनैतिक स्वतंत्रता समाजिक तथा आर्थिक उन्नति के लिये अनिवार्य है, वही आत्मिक स्वतंत्रता भी शान्ति और शाश्वत आनन्द के लिये आवश्यक है। एक ओर देश उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति आभार व्यक्त करता है, जिन्होने देश की स्वतंत्रता के लिये अपना जीवन बलिदान कर दिया था, वहीं दूसरी ओर मिशन उन महात्माओं के तप त्याग को याद करता है, जिन्होने सत्य ज्ञान की दिव्य ज्योति द्वारा मानवता का कल्याण करने में अपना सारा जीवन लगा दिया है। कहा कि मुक्ति पर्व पर संत निरंकारी मिशन के सूत्रधार बाबा बूटा सिंह, युगपुरूष बाबा अवतार सिंह, जगतमाता बुद्धवती, राजमाता कुलवन्त कौर तथा सदगुरू बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, माता सविन्दर एवं संत अवनीत सेतिया सहित सभी ब्रम्हलीन संतो को याद किया जाता है। अंत में उन्होने कहा कि इन्द्रियों के वश में रहने वाला मानव कभी संत नही होता। जो काम, क्रोध, मोह, अहंकार को अपने वश में करके अपने तनम न धन की सामथ्र्य को मानव सेवा में लगाता है, वही सच्चा संत होता है और देश भक्त होता है। नाना प्रकार के कर्मकाण्ड, जाति, वर्ण, आश्रम तथा रूढिवादी परम्पराओं से बंधा हुआ मानव कभी मोक्ष प्राप्त नही कर सकता है और न ही संत कहलाने का अधिकारी बन सकता है। सत्संग कार्यक्रम शाम 6 बजे से आठ बजे तक चला। इसके बाद सैकड़ों भक्तों ने लंगर का प्रसाद ग्रहण किया। सत्संग में होने वाली समस्त सेवाओं जैसे लंगर, प्याऊ, पार्किंग, पंडाल आदि समस्त सेवायें समस्त सेवादल कार्यकर्ताओं द्वारा सम्पन्न की गई। यह जानकारी मीडिया सहायक ओमप्रकाश कश्यप ने दी।

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