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क्योटो मे आईये, सड़को में तालाब का आनन्द उठाईये

वाराणसी मे तेज़ बारीश के कारण,जगह जगह जलजमाव और सीवर ओवर फ़्लो

क्या बताऊँ हाल, सड़कें गड्ढों से बदहाल

शिवपुर सेंट्रल जेल रोड पर सड़कों में गड्ढे से आम जनता का चलना दूभर, शिवपुर स्टेशन के सामने वाली पिसौर वाली रोड भी बदहाल

वाराणसी, विक्की मध्यानी । जिले के शिवपुर पुरानी चुंगी से सेंट्रल जेल जाने वाली रोड का बुरा हाल है,इस रोड पर बड़े बड़े गड्ढे बन गए हैं। जिससे आम जनता को फजीहतों का सामना करना पड़ रहा है,यही नहीं यह खतरनाक होने के साथ आवागमन को भी बाधित कर रहा है। वही अन्य सड़कों की हालत का क्या कहे थोड़े से बरसाती पानी मे गिलट बाजार,तहसील की सड़के झील के रुप मे नज़र आने लगती है। शिवपुर के पुरानी चुंगी से फुलवरिया होते हुए फोरलेन मार्ग बनाया जा रहा है सेंट्रल जेल रोड मार्ग पर खुदाई के कारण  बड़े-बड़े गड्ढे बन
गए हैं जिससे आने जाने वाले राहगीरों को चोटिल होने का खतरा बना हुआ है इन गड्ढों में अक्सर चार पहिया दो पहिया वाहन फंस जाते हैं। और अक्सर इन गड्ढों के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले दो पहिया वाहन चालक गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। जब इस बारे में जब क्षेत्रीय व्यापारी अनूप बदलानी से  चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि यह गड्ढे पिछले कुछ माह से बन गए हैं और इसमें कई  यात्री गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं,प्रशासन को इस और ध्यान देने की जरूरत है। वहीँ क्षेत्रीय निवासी रामू प्रसाद मौर्या ने कहा कि अगर जल्द ही इस ओर सम्बंधित विभाग ने ध्यान नही दिया तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना घट सकती है। स्थानीय व्यापारी बन्टी लालवानी ने बताया की स्कूल की छुट्टी  होने के बाद  काफी संख्या मे बच्चे इस रास्ते से घर जाते है  जिससे हमेशा भय बना रहता है कि कभी कोई बच्चा इन गड्ढों में गिरकर गंभीर रूप से घायल न हो जाए। विगत वर्ष से सड़क के चौड़ीकरण कर फोरलेन बनाया जा रहा है लेकिन स्थिति यह है कि बड़े-बड़े गड्ढे अभी भी इस मार्ग पर हैं जो इनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हैं,यही नहीं केंद्रीय मंत्री  महेंद्र पाण्डेय का संसदीय इलाका और यूपी के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के विधानसभा क्षेत्र में आने वाले भवानीपुर पिसौर रोड का हाल यह है कि इस रोड में गड्ढे हैं या गड्ढों में रोड है पता ही नहीं चलता,जबकि इस रोड पर स्थानीय लोगों के वाहनों के अलावा भारी माल वाहनों का आवागमन बना रहता है जिसके कारण हर साल बड़ी दुर्घटना होती रहती है। मगर आश्चर्य यह है कि प्रधानमंत्री मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट क्योटो के प्रति स्थानीय प्रशासन के साथ ही जनप्रतिनिधियों की उदासीनता देखते बनती है। 

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