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दहशतगर्दी के खिलाफ सबसे बड़ी जंग थी इमाम हुसैन की शहादत - कारी फरीद

इस्लामी साल जानवरों की कुर्बानी से खत्म और इंसान की कुर्बानी से होता शुरू 

फतेहपुर, शमशाद खान । काजी-ए-शहर मौलाना कारी फरीदउद्दीन कादरी ने कहा कि अल्लाह तआला ने चार महीनों में मोहर्रम को भी बेहद अच्छा महीना कहा है। इस्लामी साल जानवरों की कुर्बानी पर खत्म होकर इंसान की कुर्बानी से शुरू होता है। अर्थात मोहर्रम शुरू होते ही इस्लामी साल का कलेण्डर शुरू हो जाता है। उन्होने कहा कि इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत दहशतगर्दी के खिलाफ सबसे बड़ी जंग थी। क्योंकि हुसैनी खेमे ने अपना सबकुछ राहे खुदा में लुटाकर दहशतगर्दी का खात्मा किया। 
शहरकाजी ने बताया कि हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम का पर्व बड़े ही श्रद्धा के साथ दुनिया के साथ-साथ जनपद में मनाया जाता है। उन्होने कहा कि यह महीना रसूल के नवासे इमाम हुसैन की जुल्म व ज्यादती के खिलाफ जंग की याद दिलाता है। इमाम हुसैन ने यजीद के 
काजी-ए-शहर कारी फरीद उद्दीन।  
खिलाफ जंग करके दुनिया को यह शिक्षा दी कि सच्चाई बचाने के लिए हर कुर्बानी इंसान को देनी चाहिए। इसी से इंसान दुनिया में अजर और अमर कहलाता है। चूंकि इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत दहशतगर्दी के खिलाफ सबसे बड़ी जंग थी। नवासए रसूल ने अपना सबकुछ राहे खुदा में लुटाकर दहशतगर्दी का खात्मा किया। शहरकाजी ने कहा कि यदि इतिहास के पन्नों को पलटें तो अनगिनत लोग ऐसे मिलेंगे। जिन्होने अपना त्याग एवं बलिदान सतकर्मों से पापियों का नरसंहार किया है। कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन व यजीदी फौज के बीच हुयी जंग भी बुराई पर सच्चाई का प्रतीक है। मोहर्रम पर्व हजरत इमाम हुसैन के बलिदान, त्याग और जालिमों के खिलाफ मजलूमों द्वारा उठायी गयी आवाज की एक ऐसी दिल को दहला देने वाली घटना है। जिसमें न तो जालिम और न ही मजलूम के धैर्य की सीमा निर्धारित की जा सकती है। काजी-ए-शहर ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत में हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्चाई के रास्ते से कभी नहीं हटना चाहिए। बल्कि अत्याचारी का मुकाबला हिम्मत और सब्र से करना चाहिए। हजरत इमाम हुसैन व उनके बहत्तर साथियों ने अपनी शहादत देकर हमेशा-हमेशा के लिए इस्लाम का बोलबाला कर दिया। लेकिन यजीद जिंदा रहकर भी मौत के आगोश में समा गया। शहरकाजी ने कहा कि हुसैनियत और यजीदियत की यह जंग उस समय तक चलती रहेगी। जब तक स्वार्थी संसार एक-दूसरे से मुकाबला करता रहेगा। शहरकाजी ने समाज के सभी लोगों से अपील की है कि पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षा पर अमल व इमाम हुसैन के पैगाम की रोशनी मंे वह काम करंे जिसके लिए इस्लाम ने हमें इजाजत दी है और कोई ऐसा काम न करें जो शरीयत के खिलाफ हो। उन्होने नमाज की पाबंदी के साथ-साथ पूरे दस दिनों तक गरीबों की मदद, भूखों को खाना तथा प्यासों को पानी पिलाने की भी अपील की है। शहरकाजी ने कहा कि इमाम हुसैन की याद में दिल खोलकर ज्यादा से ज्यादा लंगर करें।

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