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धन बल असत्य स्थायित्व हीन..............( वरिष्ठ पत्रकार )देवेश प्रताप सिंह राठौर

धन, बल, असत्य, स्थायित्व हीन.......... देवेश प्रताप सिंह राठौर (वरिष्ठ पत्रकार)… ............. आज हम सब धन वल से असत्य का सहारा लेकर बड़े तो बन जाते हैं और समाज में अपनी एक ख्याति प्राप्त कर लेते हैं, एक  समय ऐसा आता है  देश के सर्वोच्च पद पर बैठे लोग उनका सम्मान करने लगते हैं। और वह धन ,बल, असत्य के कारण अपने सत्य को भूल जाते हैं। परंतु स्नेह स्नेह जब असद पर चलने वाले लोग जब उनका अन्याय का अंत होता है उसका मुख्य कारण है कि वह अपने पद से टूट जाते हैं। और पतन का रास्ता वहीं से तय हो जाता है। आज हम विश्व के पटल पर देखें। सैकड़ों उदाहरण है इन उदाहरणों में सबसे प्रथम नाम आता है सद्दाम हुसैन का जो इराक के राष्ट्रपति थे जिनका इराक में परचम लहराता था। सद्दाम सद्दाम की जय कार थी। परन्तु उनका अंत किस तरह हुआ। क्या कभी सद्दाम हुसैन मैं सोचा होगा नहीं परंतु उन्होंने जिस तरह गृह के अंदर जो कार्य किए। उसी का प्रणाम हुआ कि सद्दाम हुसैन का नामोनिशान मिट गया इराक से क्योंकि असत्य का रास्ता लंबे समय तक नहीं चलता और व्यक्ति या मानव भूल जाता है कि हम जिस पथ पर चल रहे हैं उसका पतन सुनिश्चित है परंतु अपने अहंकार में स्वयं के साथ पूरे परिवार को बली पर चढ़ा देता है। यही ध्यास में देखा गया है। लीबिया के कर्नल गद्दाफी  आए उनका भी पतन किस तरह हुआ। सीरिया पर किस तरह पतन हो रहा है वह देख रहे हैं। धीरे धीरे आपने देखा होगा ओसामा बिन लादेन जैसा विश्व का नंबर वन आतंकवादी मैं क्या कभी सोचा था हम पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश में सुरक्षित हैं हमें कोई मार पाएगा परंतु अस्त्य के रास्ते पर चलते हुए उसे भी पाकिस्तान में मार गिराया गया। और जो लोग अभी बच्चे हैं को भी आने वाले समय में अवश्य मार गिराए जाएंगे। अभी आपने बगदादी के बारे में भी सुना है आई एस आई एस आई का मोस्ट वांटेड आतंकवादी बगदादी भी वंकर में इराक में मार गिराया गया । उसकी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि कर दी है। कोई भी व्यक्ति गलत काम करेगा उसका अंत सुनिश्चित कुछ समय तक वह बुलंदियों पर रहता है और वह भूल जाता है कि जिस रास्ते पर चल रहे हैं और आस्था टिकाऊ नहीं होता है। अन्यायी अन्याय जितना करें लेकिन एक समय ऐसा आएगा जब हो उसका पतन हो जाएगा। आपने देखा होगा बहुत से लोग हैं जो गलत काम करते हैं। गलत कामों में सफेद पोशी का चोला ओडे होते हैं। जब धीरे-धीरे सफेद पोशी अपने कारनामों को रूप में रूप देता  रहता है, उसे लगता है कि अब मेरा कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा बस वही उसका भ्रम उसको अंत का कारण बनती है। इंसान अपने सत्य को पहचानने लगे तो अस्त्य के रास्तों को अपनाना नहीं चाहेगा। हो जान जाएगा कि हम अभी तक जिस रास्ते पर चले हैं हम धन वल और सफेद पोशी तक हम पहुंच चुके हैं । अब हम सत्यपर चलकर कुछ अच्छा करने की सोच बनाएं। परंतु उनके  चाटुकार लोग जॉन के साथ रह के उनसे अधिक धनवल से मजबूत हो गए हैं वह उन्हें सही रास्ते पर चलने के लिए कभी प्रोत्साहित नहीं करते। वहभड़काने का काम किया करते हैं । जिस कारण वह अपने पद पर निरंतर बढ़ते पढ़ते हो पतन के रास्ते पर जब अग्रसर हो जाते हैं। उसी स्थिति में वह लोग छोड़ कर भाग जाते हैं, तब अकेले बसते हैं तब उन्हें एहसास होता है इस सत्य का रास्ता कितना अच्छा होता है। परंतु तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और उनका अंत सुनिश्चित कानून के दायरे में बन जाता है। धन वालों की बात अब हम प्रदेश के अंदर या देश के अंदर की बात करे उसमे एक नाम आतंकी के क्षेत्र में 1 व 2 ही वर्षों तक कायम रहा जिसका नाम श्री प्रकाश शुक्ला था। श्री प्रकाश शुक्ला इतना अपने बल में खो चुका था क्यों जिसकी पाता था सुपारी ले लिया करता था मारने की। उसी क्रम में एक नाम मुख्यमंत्री का था जो वर्तमान में मुख्यमंत्री थे उनके खिलाफ हो गया उसी समय एसडीएफ का गठन हुआ। और श्री प्रकाश शुक्ला का अंत कर दिया गया। जिसने एक 2 वर्षों में ही इस तरह की वारदातें की जिससे प्रदेश को हिला कर रख दिया था। आप दूसरी कड़ी में नाम आता है मुन्ना बजरंगी का मुन्ना बजरंगी ने विधायक गाजीपुर के कृष्णानंद राय का हत्या की थी । एक बार इसके द्वारा एसटीएफ से मुठभेड़ भी हुई है। और इसे गोली भी लगी लेकिन यह बच गया। और इसका साम्राज हमेशा चलता रहा। और इसका भी कुछ महीनों पूर्व इसका अंत हुआ।मेरा यह कहना है कि जो भी व्यक्ति अन्याय के रास्ते पर चलता है उसका अंत सुनिश्चित है। फिर  भी वह रास्ते पर निरंतर आगे बढ़ता रहता है। और भी बहुत से नाम है जो आतंकी क्षेत्र में परचम लहराया था और उनका भी अंत हुआ है। उसी क्रम में एक नाम था ददुआ का माफिया डकैत जो बांदा और चित्रकूट में उसका एकछत्र राज्य था। उसका अंत में किस तरह हुआ कोई राजनीतिक दल  बचाना चाहता है। कोई जो भी राजनीतिक दल जब आने पर उसकी मन की नहीं होती तो मरवा देता हूं। यही हमारे नेता है जो तैयार करते हैं इन लोग को , जब इनकी सोच किसी अन्य दलके साथ बदल जाती है। भोजन के पतन का रास्ता बनाते हो जाता है।क्योंकि मैं मानता हूं यह जितने भी आतंकी है जितने भी घरेलू चीजें हैं यह सफेद पोशी की देन है।नेताओं का चरित्र कैसा होता है मैं आपको एक छोटी सी दीपावली के दिन की बात बताना चाहता हूं। दीपावली में लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है। और हम सब अपने रीति रिवाज से पूजा करते हैं। मैं पूजा के लिए कमल की कली लेने फूल वाला की दुकान पर गया। वहां पर एक वरिष्ठ नेता खड़े हुए उस दुकान पर कमल की कली  ले रहे थे। उन्होंने ₹ पचास में दो कमल की कली ली , मैंने भी ₹50 में तो मैंने भी कमल की दो कली ले ली पचास रुपए में। तथा नेता जी हम से कह रहे थे। यह पांच एवम् दस रुपए की कमल की कली आती है लेकिन यह गरीब है आज के दिन इनको 25 ,25  रुपया दे देना चाहिए। और वह लेकर चले गए। अपनी गाड़ी में बैठे ही थे एक फूल वाला और आ गया सुबह का टाइम था। उसे पूछने लगे तुम कमल काली कितने में दोगे। उसने कहा बोनी करेगे आप ले लीजिए बोनी का टाइम है ₹10 की आपको दे देंगे। वह तुरंत गाड़ी से उतरे भाग करा आएऔर  बोले ला मेरा ₹50, ठग कहीं का। उसने डरते हुए ₹50 लौटा लिए तथा उन्होंने कमल दो कली वापस कर दी। जबकि और नेताजी आधा किलो की सोने की चैन पहने थे, सिल्क का कुर्ता पहने थे लगभग 4 या 5, हजार का । अंगूठी पहने थे आठ के करीब । फॉर्चून गाड़ी थी। मेरा कहने का मतलब यह है कि गरीब की बात करने वाले लोग,जब हकीकत आती है तो वह मुझे उनके चरित्र को साफ दिखाई दे गया। यह सफेद पोशी नेताओं का चरित्र है कहते कुछ है मन में कुछ होता है। यह लोग गरीब की बात करने वाले लोग सिर्फ जनता को मूर्ख बनाते अगर वह कमल की कली वाले ने ₹15 देख ले लिए थे। और इस तरह की गरीब की बात कर रहे थे और जरासंध ₹10 की और  कमल की कली दे दी उसने उन्हें सही लगा। और तुरंत ₹15 में ही उनकी नियत डगमगा गई मैंने उससे गए कमल की कली वापस नहीं कि जोर उतने ही में लेके चला आया। यह नेता और जनता का चरित्र जनता जनता का दर्द समझती है नेता सिर्फ जनता का वोट लेना जानते हैं खून पीना जानते हैं उनका प्रयोग करना जानते हैं उनको मूर्ख बनाना आता है किस तरह हमारे पीछे रहेंगे वह भाषा शैली आती है जिस कारण उनको नेता का दर्जा प्राप्त हो जाता है।आज की जनता भी यही चाहती है कि जितना हमें मूर्ख बना सके बनाओ सही आदमी का जनता भी चैन नहीं कर सकती है। यह हकीकत आज के नेताओं की अगर जमीन से जुड़ा हुआ नेता खाली हाथ किसी गांव में दो चार आदमी बिना भुकाल के चले जाते हैं। और वहीपर माफिया 4 या 5 लग्जरी गाड़ी और दस व वीस अस्सलह ले कर साथ जाता है । उसे बहुत पूछते हैं कहते हैं यही असली नेता है।जिसके पास गाड़ी भी नहीं हो पैदल चला आता है किसी की गाड़ी मांग कर उसे कहते हैं यह बेकार है । आज के हमारे देश की जनता की सोच ही ऐसी बन गई है उन्हें माफिया चाहिए सही व्यक्ति का चयन करना नहीं आता है। जिस कारण भ्रष्टाचारी अनैतिकता बढ़ती जा रही है।क्योंकि जब सही लोग नहीं आएंगे तो सही कार्य किस तरह हो पाएंगे इसकी जिम्मेदार स्वयं जनता है।

Devesh Singh journalist

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