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उपासना व योग क्रियाओं को अपनाकर समाज को सुखी रखा जा सकता है - स्वामी


 पड़ाव चंदौली, मोतीलाल गुप्ता। सद्गुरु धाम आश्रम गंगा तट में आयोजित नवरात्रि शक्ति आराधना शिविर व स्वर से समाधि प्रशिक्षण शिविर में जहां देश-विदेश से आए साधक गढ़ आयोजन का लाभ उठा रहे हैं वही प्रातः काल से साधना के उपक्रम में स्वामी श्री कृष्णानंद जी द्वारा कराया जाना है तथा दोनों समय यज्ञ आरती उपरांत साधक गणों को महाराज श्री जी अध्यात्म वर्धक के वैज्ञानिकतम रहस्य पर प्रकाश डालते हुए भारतीय सभ्यता संस्कृति श्रेष्ठतम उदाहरण प्रदान किए। महाराज जी ने कहा नवरात्र आशनी 9 दिवस यह शक्ति आराधना प्रत्येक 3 माह के काल खंडों में आती है तथा हमारे ऋषियों ने वर्ष में चार नवरात्र जिसमें दो प्रत्यक्ष दो गोपनीय रखा है तथा बताएं कि चारों नवरात्र में चार बड़े त्यौहार आषाढ़ में रथ द्वितीय अश्विनी में विजयदशमी मार्ग में वसंत पंचमी तथा चैत्र नवरात्र में रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। शक्ति आराधना का मूल उद्देश्य समाज में संगठन खड़ा करना है क्योंकि कलयुग में संगठन शक्ति तथा यह नवरात्र आप देखेंगे कि ऋतु के संधिकाल में भी आना है जब एक ऋतु से दूसरे ऋतु में प्रवेश करते हैं तो भौगोलिक वातावरण अर्थात पंचतत्व में प्रकृति में कुछ परिवर्तन देखा जाता है जिसके चलते रोग शोक महामारी फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है अतः अपना शरीर उन्हीं पंच तत्वों से बना है पंच भौमिक शरीर है तो इस कालखंड से कैसे स्वस्थ रहें इसलिए धर्म को जीवन शैली से तारतम्य बैठाकर राम नियम प्रत्याहार खानपान संशोधन पद्धती व्रत संयम उपासना व योगी क्रियाओं को अपना कर समाज को सुखी रखा जा सकता है। वही आश्रम के महान श्री जनेश्वर स्वामी द्वारा यह जानकारी दिया गया कि नवरात्र शक्ति आराधना पूर्व की पूर्णाहुति रविवार की सुबह 6:00 बजे से ब्रह्म दीक्षा गुरु दीक्षा तत्पश्चात राम रसायन यज्ञ समापन नवचंडी अष्टमी यज्ञ तत्पश्चात स्वामी कृष्णायन जी महाराज के प्रवचन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है जिसमें क्षेत्र के लोग और आए हुए श्रद्धालु लाभान्वित होंगे।

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