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जेएनयू बन रहा, एक आतंकी गढ़

देवेश प्रताप सिंह राठौर
 (वरिष्ठ पत्रकार)

जवाहरलाल यूनिवर्सिटी जेएनयू आज इस स्थिति में है की आप देख रहे होंगे बहुत ही तुच्छ मानसिकता के भारत विरोधी एक जेएनयू संगठन है यहां पर अधिकतर देखने को मिलता है की भारत में रहने वाले बहुत से लोग भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त मैं एक जेएनयू एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पूर्ण रूप से हम कह सकते हैं यह संगठन आतंकवादी का गढ़ है कैसे जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ्ती आपने स्पीच में कहती थी काश्मीर में कहती थी की धारा 370 हटी कश्मीर में कश्मीर में तिरंगा नहीं दिखाई देगा यह सोच महबूबा मुफ्ती की है यही सोच उमर अब्दुल्ला की रही है आप ने देखा होगा दीपिका पादुकोण फिल्म अभिनेत्री जो जेएनयू जाती है और वहां जाकर जले में नमक छिड़कने का काम जो किया उसे पूरा देश ने देखा दीपिका पादुकोण को पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के आतंक को नहीं दिखाई वहां पर किस तरह छात्र कालेजों एवं कितना घोर ममता बनर्जी अपराध पर अपराध करा रही हैं जिसे आप समाचारों के माध्यम से सब प्राप्त हो रहा है वह दीपिका पादुकोण को कहीं नहीं दिखाई देता दीपिका पादुकोण एक्टर को बनाने वाला एक्टर कौन है वह उस वफादारी को निभा रही है सभी जानते हैं कि उनको फिल्मों में लाने वाला कौन सी फिल्मी हस्ती है यह बताने की जरूरत है उन्होंने कुछ वर्ष पहले एक इंटरव्यू दिया था जिसमें कहा था कि हमारी इच्छा है राहुल गांधी प्रधानमंत्री बने तथा हम राजनीति के बारे में नहीं जानते हैं यह सिर्फ अपने को सब जानते हुए एक अपनी बात कहने का लोगों को मूर्ख बनाने का अच्छा रास्ता यह सब लोग अपना लेते हैं कि हमें राजनीति नहीं मालूम है फिल्मों में आने वालापक्के राजनीति वाले होता है नहीं वह फिल्मों में आई ही नहीं सकते इसलिए उन्होंने जेएनयू में जाकर एक पक्ष को देखा दूसरे पक्ष का अनादर किया इसके पहले भी बहुत से जैनियों में दंगे फसाद हुए आजादी की मांग हुई उस समय देश के अंदर रहने वाले गद्दार कन्हैया कुमार जैसे लोग आज शिवसेना में पार्टी के लोग उसे सम्मान दे रहे हैं यह सब विनाश काले विपरीत बुद्धि कही जा सकती है क्योंकि बाबा साहब बाल ठाकरे ने जो बोया है उसे आज उधव ठाकरे ने मुख्यमंत्री के रूप में काटा है लेकिन राजनीत का पतन की ओर पार्टी को तैयार कर दिया है जिस तरह उत्तर प्रदेश में सपा बसपा रालोद का हाल है वही आने वाले समय में शिवसेना का होने स्थित तय करेगा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अनुच्छेद 370 को लेकर आयोजित कार्यक्रम में बीवी काफी बवाल किया गया था
 जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में अनुच्छेद 370 पर कार्यक्रम रखा गया था 'आर्टिकल 370 का अंत: कश्मीर में शांति और विकास'
इसमें लेफ्ट विंग के स्टूडेंट्स और राइट विंग एबीवीपी के स्टूडेंट्स भिड़ गएवक़्त नहीं है? हाइलाइट्स पढ़ने के लिए जेएनयू में कश्मीर पर चर्चा हंगामे में बदल गई। जेएनयू प्रशासन की ओर से कन्वेंशन सेंटर में गुरुवार को एक लेक्चर रखा गया।  'आर्टिकल 370 का अंत: कश्मीर में शांति और विकास'। मगर गुरुवार शाम 4 बजे रखे गए इस प्रोग्राम में लेफ्ट विंग के स्टूडेंट्स और राइट विंग एबीवीपी के स्टूडेंट्स भिड़ गए। एक दूसरे को धक्का देते, गलत बर्ताव करते स्टूडेंट्स दिखे।
गुरुवार को इस प्रोग्राम के दौरान जेएनयू के लेफ्ट और बापसा से जुड़े स्टूडेंट्स ने विरोध कया। कन्वेंशन सेंटर के बाहर स्टूडेंट्स तख्तियों के साथ शांति से मिनिस्टर के इस प्रोग्राम का विरोध करते दिखे। स्टूडेंट्स का कहना था कि वे नहीं चाहते कि कश्मीर के मुद्दे पर कोई उस पार्टी का नेता आए, जिसने कश्मीर में हालात बिगाड़े हैं। यूनियन मिनिस्टर जितेंद्र सिंह के लेक्चर के दौरान इन स्टूडेंट्स ने कश्मीर को लेकर और उनके वापस जाने की मांग पर भी नारे लगाए। इसके बाद हंगामा शुरू हुआ, जबकि लेफ्ट के इस विरोध का जवाब एबीवीपी के स्टूडेंट्स ने दिया। स्टूडेंट्स ने कश्मीर पर नारे लगाने शुरू किए और इसी बीच दोनों ग्रुप के बीच झड़प हो गई। मामला हाथापाई तक पहुंच गया, मुश्किल से उन्हें रोका गया।
लेफ्ट से जुड़े स्टूडेंट्स ने कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाने का विरोध किया। केंद्र सरकार के इस कदम के खिलाफ उन्होंने नारे लगाए। वहीं, एबीवीपी ने 'कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत माता एक है' के नारे लगाए। इस बीच दोनों ग्रुप के बीच धक्कामुक्की, झड़प भी हुई। लेफ्ट लीडर्स का कहना है कि वे शांति से विरोध कर रहे थे मगर एबीवीपी ने हमेशा की तरह हाथापाई शुरू गई और कई स्टूडेंट्स को हाथ भी मारे। वहीं, एबीवीपी ने लेफ्ट के स्टूडेंट्स पर धक्कामुक्की और बदसलूकी का आरोप लगाया है। जेएनयू में एबीवीपी के प्रेजिडेंट दुर्गेश कुमार का कहना है, लेक्चर पूरा हुआ मगर लेफ्ट और बापसा स्टूडेंट्स ने मिनिस्टर का विरोध किया और जब हम उनके विरोध में उतरे तो उन्होंने हमारे छात्र-छात्राओं को धक्का दिया, मारा और नाखून तक मार दिया।
इस मामले में जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की आईशी घोष का कहना है कि प्रशासन ने कश्मीर के हालत की सफाई देने के लिए उस पार्टी के 
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अनुच्छेद 370 को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान AISA और एबीवीपी के छात्रों में झड़प हो गई। विश्वविद्यालय के के वामपंथी छात्रों द्वारा
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में अनुच्छेद 370 पर कार्यक्रम रखा गया थाआर्टिकल 370 का अंत: कश्मीर में शांति और विकास'
इसमें लेफ्ट विंग के स्टूडेंट्स और राइट विंग एबीवीपी के स्टूडेंट्स भिड़ गए
वक़्त नहीं है।
जेएनयू में कश्मीर पर चर्चा हंगामे में बदल गई। जेएनयू 'आर्टिकल 370 का अंत: कश्मीर में शांति और विकास' इस प्रोग्राम में लेफ्ट विंग के स्टूडेंट्स और राइट विंग एबीवीपी के स्टूडेंट्स भिड़ गए। एक दूसरे को धक्का देते, गलत बर्ताव करते स्टूडेंट्स दिखे।गुरुवार को इस प्रोग्राम के दौरान जेएनयू के लेफ्ट और बापसा से जुड़े स्टूडेंट्स ने विरोध कया। कन्वेंशन सेंटर के बाहर स्टूडेंट्स तख्तियों के साथ शांति से मिनिस्टर के इस प्रोग्राम का विरोध करते दिखे। स्टूडेंट्स का कहना था कि वे नहीं चाहते कि कश्मीर के मुद्दे पर कोई उस पार्टी का नेता आए, जिसने कश्मीर में हालात बिगाड़े हैं।इसके बाद हंगामा शुरू हुआ, जबकि लेफ्ट के इस विरोध का जवाब एबीवीपी के स्टूडेंट्स ने दिया। स्टूडेंट्स ने कश्मीर पर नारे लगाने शुरू किए और इसी बीच दोनों ग्रुप के बीच झड़प हो गई। मामला हाथापाई तक पहुंच गया, मुश्किल से उन्हें लेफ्ट से जुड़े स्टूडेंट्स ने कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाने का विरोध किया। केंद्र सरकार के इस कदम के खिलाफ उन्होंने नारे लगाए। वहीं, एबीवीपी ने 'कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत माता एक है' के नारे लगाए। इस बीच दोनों ग्रुप के बीच धक्कामुक्की, झड़प भी हुई। लेफ्ट लीडर्स का कहना है कि वे शांति से विरोध कर रहे थे मगर एबीवीपी ने हमेशा की तरह हाथापाई शुरू गई और कई स्टूडेंट्स को हाथ भी मारे। वहीं, एबीवीपी ने लेफ्ट के स्टूडेंट्स पर धक्कामुक्की और बदसलूकी का आरोप लगाया है। जेएनयू में एबीवीपी के प्रेजिडेंट दुर्गेश कुमार का कहना है, लेक्चर पूरा हुआ मगर लेफ्ट और बापसा स्टूडेंट्स ने मिनिस्टर का विरोध किया और जब हम उनके विरोध में उतरे तो उन्होंने हमारे छात्र-छात्राओं को धक्का दिया, मारा और नाखून तक मार दिया।
इस मामले में जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की आईशी घोष का कहना है कि प्रशासन ने कश्मीर के हालत की सफाई देने के लिए उस पार्टी के मिनिस्टर को कैंपस में बुलाया जेएनयू के छात्र वाम दल मानसिकता के शुरू से ही जेएनयू कम्युनिस्ट पार्टी और वाम दल के बच्चे अधिकतर वही पढ़ते हैं तथा जेएनयू का जब निर्माण हुआ था तभी से वहां पर बाम मानसिकता के लोगों का वर्चस्व रहा है, एक बार इंदिरा गांधी की सरकार ने इससे सुधारने एवं इस प्रक्रिया को शक्ति से ठीक करने का प्रयास किया था वही कांग्रेश आज जेएनयू को जाकर आग में घी डालने का काम रही है।

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